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कहीं पर ख़ुश्बूएँ बिखरीं, कहीं तरतीब उजालों की

कहीं पर ख़ुश्बूएँ बिखरीं, कहीं तरतीब उजालों की बड़ी पुरकैफ़ हैं राहें तेरे ख़्वाबों ख़यालों की पड़े रहते हैं कोने में लपेटे गर्द की चादर हमारी जिंदगी […]

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इश्क में लज्ज़तें मिला देखूँ

इश्क में लज्ज़तें मिला देखूँ उससे करके कोई गिला देखूँ कुछ तो ख़ामोशियाँ सिमट जाएँ परदा-ए-दर को ले हिला देखूँ पक गए होंगे फल यकीनन अब पत्थरों […]

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किसकी कहें, हालात से अपने कौन यहाँ बेज़ार नहीं

किसकी कहें, हालात से अपने कौन यहाँ बेज़ार नहीं ग़म से परेशाँ सब मिलते हैं, पर कोई ग“मख़्वार नहीं या तो मंजि’ल दूर हो गयी, या फिर […]

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