गुज़ारी ज़िन्दगी हमने भी अपनी इस करीने से पियाला सामने रखकर किया परहेज पीने से अजब ये दौर है लगते हैं दुश्मन दोस्तों जैसे कि लहरें भी […]
गुज़ारी ज़िन्दगी हमने भी अपनी इस करीने से पियाला सामने रखकर किया परहेज पीने से अजब ये दौर है लगते हैं दुश्मन दोस्तों जैसे कि लहरें भी […]
मिरी तन्हाई क्यों अपनी नहीं है ये गुत्थी आज तक सुलझी नहीं है बहुत हल्के से तुम दीवार छूना नमी इसकी अभी उतरी नहीं है मुआफी बख़्श […]
तेरी ख़ातिर ख़ुद को मिटा के देख लिया दिल को यूं नादान बना के देख लिया जब जब पलकें बन्द करूँ कुछ चुभता है आँखों में इक […]
आख़िर तज़ाद ज़िन्दगी में यूँ भी आ गए फूलों के साथ ख़ार से रिश्ते जो भा गए ऐसे भी दोस्त हैं कि जो मुश्किल के दौर में […]
सांसों में लोबान जलाना आखि़र क्यों पल पल तेरी याद का आना आखि़र क्यों जिसको देखो वो मसरूफ है ख़ुद ही में रिश्तों का फिर ताना बाना […]
तुमसे मिलने की आस बाकी है पास दरिया है प्यास बाकी है वो तो मिलता है अपने तेवर में मुझमें अब भी मिठास बाकी है मिल चुके […]
हर चेहरे की यह तहरीर कुछ बाजू और कुछ तकदीर पेट की ख़ातिर सारे करतब डाकू हो या कोई फकीर तुम अपनी खुद राह तलाशो आबे-रवाँ की […]
रात दिन अपने घर में रहता है जाने कैसे सफर में रहता है बच के रहता है अपनी आँखों से वो जो सबकी नजर में रहता है […]
किस किस तरह से दोस्तो बीती है जिन्दगी दरिया सी चढ़ के, बाढ़ सी उतरी है जिन्दगी तुम पास थे तो चाँदनी अपने करीब थी तुम दूर […]
वो कभी गुल कभी ख़ार होते रहे फिर भी हम उनको दिल में संजोते रहे इश्क का पैरहन यूँ तो बेदाग था हम मगर उसको अश्कों से […]