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सुमिरो पवन कुमार

वो साल था 2013, उन दिनों मैं बतौर स्ट्रिंगर अमर उजाला चंदौसी में कार्यरत था। चंदौसी वही जगह है जहां से हिंदी के महान ग़ज़लकार दुष्यंत कुमार […]

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बैठा नदी के पास यही सोचता रहा: पवन कुमार

बैठा नदी के पास यही सोचता रहाकैसे बुझाऊँ प्यास यही सोचता रहा शादाब वादियों में वो सूखा हुआ दरख़्तकितना था बेलिबास यही सोचता रहा कितने लगे हैं […]

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मुड़ मुड़ के देखता हूं

भारत भूषण पंत

फ़िक्र को गिरहों में बांधने का लाजवाब  हुनर था भारत भूषण पंत में… आज अगर शायर भारत भूषण पंत हमारे बीच होते तो हम उनका 62 वां […]

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मशहूर शायर ‘पवन कुमार’ होंगे अमर उजाला काव्य कैफ़े लाइव में अगले मेहमान

अमर उजाला काव्य, काव्य कैफ़े लाइव के माध्यम से प्रतिदिन शाम 5 बजे आप के लिए कला और साहित्य के क्षेत्र के मशहूर कलाकारों को लेकर हाज़िर होता है। […]

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काव्य चर्चा-शायरी की रवायतों और रिवाज

शायरी की आज तक न जाने कितनी परिभाषाएं दी जा चुकीं हैं और आज तक दी जा रही हैं लेकिन ये सारी परिभाषाएं जब ठीक से यह […]

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