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रात

वक्त के मेले में जब भी रात घूमने निकलती है न जाने क्यूँ हर बार अपने कुछ बेटों को जिन्हें ‘लम्हा’ कहते हैं छोड़ आती है। ये […]

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जादू

तुम्हारे जिस्म में वह कौन सा जादू छुपा है कि जब भी तुम्हें एक नज़र देखता हूँ, तो मेरी निगाह में यक-ब-यक हज़ारों-हज़ार रेशमी गिरहें सी लग […]

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फिर भी कितना अनजान हूँ तुमसे

फिर भी कितनी अनजान हूँ तुमसे। ख़्वाबों में ख़्यालों में शिकवों में गिलों में मेंहदी में फूलों में सावन के झूलों में झरनों के पानी में नदियों […]

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