उर्दू अदब में नारीवाद, मानवाधिकारों और लोकतांत्रिक आवाज़ को बुलंद करने वाली पाकिस्तानी शायरा और सामाजिक कार्यकर्ता फ़हमीदा रियाज़ 22 नवंबर को दुनिया को अलविदा कह गईं। […]
उर्दू अदब में नारीवाद, मानवाधिकारों और लोकतांत्रिक आवाज़ को बुलंद करने वाली पाकिस्तानी शायरा और सामाजिक कार्यकर्ता फ़हमीदा रियाज़ 22 नवंबर को दुनिया को अलविदा कह गईं। […]
करीब पांच साल के बाद शायर पवन कुमार का नया मजमुआ ‘आहटें’ हमारे हाथ में है। 2012 में आई अपनी पहली किताब ‘वाबस्ता’ के हवाले से शायरी […]
सिर्फ ज़रा सी जिद की ख़ातिर अपनी जाँ से गुजर गए एक शिकस्ता कश्ती लेकर हम दरिया में उतर गए तन्हाई में बैठे बैठे यूँ ही तुमको […]
हम तुम हैं आधी रात है और माहे-नीम है क्या इसके बाद भी कोई मंजर अज़ीम है लहरों को भेजता है तकाजे के वास्ते साहिल है कर्जदार […]
कुछ लतीफों को सुनते सुनाते हुए उम्र गुजरेगी हंसते हंसाते हुए अलविदा कह दिया मुस्कुराते हुए कितने गम दे गया कोई जाते हुए सारी दुनिया बदल सी […]