कन्नौजी बोली के संरक्षण और संवर्धन

कन्नौजी बोली के संरक्षण और संवर्धन के लिए एक वेबसाइट और ऑनलाइन त्रैमासिक पत्रिका पडुकिया का लोकार्पण किया गया। साल के पहले दिन ऑनलाइन हुए इस लोकार्पण के दौरान मुख्य अतिथि ग्रामीण विकास मंत्रालय के निदेशक आईएएस पवन कुमार रहे। उन्होंने कहा कि आज डिजिटल युग है। ऐसे में कन्नौजी बोली की वेबसाइट और पत्रिका युवाओं व शोधकर्ताओं के लिए अत्यंत उपयोगी साबित होगी।
पत्रिका के संपादक वीरेंद्र कुमार चंद्रसखी ने कहा कि पडुकिया एक ऐसी चिड़िया है जो बहुत ही सीधी, भोली और मेहनती होती है। हमारी कन्नौजी बोली भी सरल और सहज है। इसमें प्रचुर साहित्य उपलब्ध है। उन्होंने बताया कि कन्नौजी बोली की वेबसाइट kannaujiboli.in है और पत्रिका पडुकिया में कन्नौजी लोरियां, बालगीत, कवितावली, गीतावली, नौटंकी, नकटौरा और बाल नाट्य आदि का उल्लेख होगा। इस अवसर पर डाॅ. अपूर्वा अवस्थी, डाॅ. प्रखर दीक्षित, अमूल्य शुक्ला, शोधकर्ताओं पारस सैनी और समीक्षा यादव ने भी अपनी बात रखी। सुमन पाठक और नरेश द्विवेदी शलभ ने कन्नौजी लोकगीत गाए।