Archive for Category: नज़्में

एक लम्हा

सिर्फ इक लम्हा गुज़ारा था तेरे साथ कभी और इक उम्र भरी पूरी उम्र कट गई सिर्फ उसी लम्हे की यादों के सहारे ऐ दोस्त काश! और इक उम्र तेरे साथ गुज’रने पाती।

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ईशी के लिए

अब दुनिया के मैदान-ए-जंग में जब आ ही गई हो तुम, तो कुछ मसअले कुछ नसीहतें कुछ फि’करें कुछ अक़ीदतें कुछ फ’न कुछ शरीअतें अपने बटुए में रख लो। ये सारी मुहरें मैंने और तुम्हारी माँ ने वक्त को ख़र्च करके ख़रीदी हैं।

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जादू

तुम्हारे जिस्म में वह कौन सा जादू छुपा है कि जब भी तुम्हें एक नज़र देखता हूँ, तो मेरी निगाह में यक-ब-यक हज़ारों-हज़ार रेशमी गिरहें सी लग जाती हैं।

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दरिया

अक्सर हमने देखा है थमे हुए सैलाबों में, या रूके हुए तालाबों में कुछ गंदला सा जम जाता है ऐसी ही कुछ आँखों के अन्दर थमे हुए दरिया में भी हो सकता है इस दरिया को रोको मत मुमकिन है जि’यादा दिन तक ठहरे रहने से ये दरिया भी...

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कविता, ग“ज“ल और नज़्म

तुम्हारी मासूम धुली-धुली सी आँखों के एक कोने में इक ख़याल छुपा सा बैठा है, लफ़्जों के जाल उसे फाँस न लें, शायद इसलिए दुबक के बैठा है। खारे पानी की चादर ओढ़े ख़याल की पेशानी पर कुछ बल लहरों की तरह उठते हैं, गिरते हैं और उधर लफ़्ज…...

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अब के बरस

तमाम रात वे क’तरे जो गिरते हैं छतों पर सूरज की चमकती किरनें जिन्हें सफ़ेद सोना बना देती हैं उनके जेवर पहन कर देखो। वे तमाम ख़्वाब जो सोते-जागते देखते हैं या खुदा सब के सब ताबीर हो जायें। तमाम रिश्ते, जो बेइंतहा खूबसूरत हो सकते थे मगर वक्त...

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रिश्ते

क्या ख़तो- किताबत का होगा, ये रिश्ते हैं, पल दो पल के, हैं आज अगर ये जिंदा तो, क्या शर्त है कल तक जीने की। ये आसमान का धुंधलापन, मीलों तक छाई ख़ामोशी, है भोर का कोई छोर नहीं, क्या चाह रखूँ अब जीने की।

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फिर भी कितना अनजान हूँ तुमसे

फिर भी कितनी अनजान हूँ तुमसे। ख़्वाबों में ख़्यालों में शिकवों में गिलों में मेंहदी में फूलों में सावन के झूलों में झरनों के पानी में नदियों की रवानी में तुम ही तुम हो फिर भी कितना अनजान हूँ तुमसे। पतझड़ में सावन में दिल के किसी आंगन में...

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क्या यही वक्त है घर आने का

…और कभी मैं घर को लौटूँ, तुम दालान के बाहर। उस छोटी सी मुंडेर पे, जिसपे हर शाम परिंदे आ-आकार। कुछ दाने से चुन आते हैं, वक्ते अस्र की आवाज़े। और तुम गोया खुदनगर उस दालान की ईंटों पर गालों को कुहनी पे टिकाकर मेरा रास्ता तकती हो, मैं...

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