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मसूरी

मसूरी एक निहायत खूबसूरत दोशीजा जिसके माथे पर सूरज की लाल बिन्दी है, तो तमाम तराशे हुए कुहसार उसके अल्हड़पन के गवाह हैं। मसूरी! जब सुबह चांदी […]

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यादें

बड़ी बेशऊर हैं तुम्हारी यादें न दस्तक देती हैं और न ही आमद का कोई अंदेशा न कोई इशारा और न कोई संदेसा गाहे-ब-गाहे वक्त-बे-वक्त दिन-दोपहर हर […]

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अमानत

परत-दर-पर तह-ब-तह ज़िन्दगी-ज़िन्दगी…। यही इक अमानत मुझे बख़्शी है मेरे खुदा ने। इसी में से ये ज़िन्दगी यानी ये उम्र अपनी तेरे नाम कर दी है मैंने। […]

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रात

वक्त के मेले में जब भी रात घूमने निकलती है न जाने क्यूँ हर बार अपने कुछ बेटों को जिन्हें ‘लम्हा’ कहते हैं छोड़ आती है। ये […]

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