Archive for Category: ग़ज़लें

जहां हमेशा समंदर ने मेहरबानी की

जहां हमेशा समंदर ने मेहरबानी की उसी ज’मीन पे कि’ल्लत है आज पानी की उदास रात की चौखट पे मुन्तजिर आँखें हमारे नाम मुहब्बत ने ये निशानी की तुम्हारे शह्र में किस तरह जिंदगी गुज’रे यहाँ कमी है तबस्सुम की, शादमानी की मैं भूल जाऊँ तुम्हें सोच भी नहीं...

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