Archive for Category: ग़ज़लें

एक ग़ज़ल मेरी भी

लफ्ज़ पत्रिका ग़ज़लों को प्रकाशित करने वाली त्रैमासिक पत्रिका है। ये पत्रिका दिल्ली से प्रकशित होती है । इसके सम्पादक तुफैल चतुर्वेदी हैं जो मेरे मित्र भी हैं। आज जितनी भी पत्रिकाएं ग़ज़लों को प्रकाशित करने की दिशा में काम कर रही हैं उनमे इस पत्रिका का नाम काफी...

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एक ग़ज़ल कच्ची सी……..

दिलों का रिश्ता कुछ इस तरह निभाया जाए, अजनबी शहर में नया दोस्त बनाया जाए। वो नही पर उसका ख्याल बिखरा है हरसू, उसके ख्याल की रौशनी से नहाया जाए। ताल्लुक कुछ तकल्लुफ से भी जुदा हैं, उन ताल्लुकों को तकल्लुफ से निभाया जाए। उसके आने का कुछ शोर...

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मसूरी की बरसात

कल रात मसूरी में जबरदस्त बरसात हुई. हालांकि हमें यहाँ आए लगभग एक सप्ताह होने को जा रहा था लेकिन मौसम में मसूरी वाली बात नही आ पाई थी. रात में बहुत ज्यादा ठंडक भी नही थी और बरसात तो बिल्कुल भी नही थी. हम शाम जैसे ही मॉल...

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साँसों में लोबान जलाना……..

काफी दिनों बाद इधर ब्लॉग पर लिखने की भूख बढ़ गयी . दिल नहीं माना और फिर से लिखना शुरू किया……. व्यस्तता के बाद ब्लॉग पर लिखने का क्रम जोड़ना वाकई सुखद रहा. इधर कल बारिश हो रही थी….ऐसे शानदार मौसम में मैंने एक ग़ज़ल लिखी…… या यूँ कहिये...

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“साँसों में लोबान जलाना आखिर क्यों “-2

एक अरसे बाद मैंने दो तीन दिनों पहले अपने ब्लॉग पर अपनी नयी ग़ज़ल पोस्ट की ……..मैं जब भी ग़ज़ल लिखता हूँ तो सबसे पहले जिन लोगोंको उसे सुना कर प्रतिक्रिया लेता हूँ उनमे अकील नोमानी, मनीष, अंजू, जोनी, सुमति शामिल होते हैं….ये वे लोग हैं जिनसे मुझे मेरी...

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ओरछा के किले से………….

हुज़ूर फिर हाज़िर हूँ……पिछले दिनों मैं यू पी दर्शन पर था….अकेलापन नए एहसास को जगाने में हमेशा मोडरेटर की भूमिका निभाताहै……ऐसा ही कुछ मेरे साथ ओरछा में हुआ . ओरछा के किले में अकेलेपन के माहौल में और बेतवा के किनारे बैठकर ओरछा रिसॉर्ट में एकग़ज़ल लिख डाली….बगैर किसी...

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नयी ताज़ा ग़ज़ल……….

मित्रों ने कहा कि बहुत दिनों से अपनी कोई ग़ज़ल पोस्ट नहीं की….क्या कहता उनसे….असल में खुद को कहाँ तक पोस्ट में रखता रहूँ…..दुनिया जहान में इतने लोग -इतने किस्से -इतनी घटनाएँ हैं कि उनके बारे में लिखते हुए ही आनंद महसूस करता हूँ….बहरहाल अपने दोस्त मनीष की मांग...

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………….किनारे टूट जाते हैं

टूटन भी एक प्रक्रिया है जो जीवन में लगातार चलती रहती है…..टूटन नहीं होगी तो सृजन कैसे होगा……..कभी दिल टूटता है तो कभी बंदिशें. कभी दरिया की ठोकर से साहिल टूटता है तो कभी ज़रुरत के समय इंसानी भरोसे…….! कभी वादे टूटते हैं तो कभी नाज़ुक से एहसास….! इसी...

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