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उतरा है ख़ुदसरी पे वो कच्चा मकान अब

उतरा है ख़ुदसरी पे वो कच्चा मकान अब लाजिम़ है बारिशों का मियां इम्तिहान अब मुश्किल सफ’र है कोई नहीं सायबान अब है धूप रास्तों पे बहुत […]

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एक ग़ज़ल मेरी भी

लफ्ज़ पत्रिका ग़ज़लों को प्रकाशित करने वाली त्रैमासिक पत्रिका है। ये पत्रिका दिल्ली से प्रकशित होती है । इसके सम्पादक तुफैल चतुर्वेदी हैं जो मेरे मित्र भी […]

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“साँसों में लोबान जलाना आखिर क्यों “-2

एक अरसे बाद मैंने दो तीन दिनों पहले अपने ब्लॉग पर अपनी नयी ग़ज़ल पोस्ट की ……..मैं जब भी ग़ज़ल लिखता हूँ तो सबसे पहले जिन लोगोंको […]

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ओरछा के किले से………….

हुज़ूर फिर हाज़िर हूँ……पिछले दिनों मैं यू पी दर्शन पर था….अकेलापन नए एहसास को जगाने में हमेशा मोडरेटर की भूमिका निभाताहै……ऐसा ही कुछ मेरे साथ ओरछा में […]

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