Currently browsing: अखबार/ पत्र- पत्रिकायें

बैठा नदी के पास यही सोचता रहा: पवन कुमार

बैठा नदी के पास यही सोचता रहाकैसे बुझाऊँ प्यास यही सोचता रहा शादाब वादियों में वो सूखा हुआ दरख़्तकितना था बेलिबास यही सोचता रहा कितने लगे हैं […]

Read more

मशहूर शायर ‘पवन कुमार’ होंगे अमर उजाला काव्य कैफ़े लाइव में अगले मेहमान

अमर उजाला काव्य, काव्य कैफ़े लाइव के माध्यम से प्रतिदिन शाम 5 बजे आप के लिए कला और साहित्य के क्षेत्र के मशहूर कलाकारों को लेकर हाज़िर होता है। […]

Read more

काव्य चर्चा-शायरी की रवायतों और रिवाज

शायरी की आज तक न जाने कितनी परिभाषाएं दी जा चुकीं हैं और आज तक दी जा रही हैं लेकिन ये सारी परिभाषाएं जब ठीक से यह […]

Read more

कविता परस्पर की कविताओं में झांकती है मन की जमीन पर लरजती संवेदनाएं

साहित्य में एक नया तबका सामने आ रहा है नौकरशाह कवियों-लेखकों का. राजस्थान कैडर के आईएएस डॉ जितेंद्र सोनी द्वारा संपादित कविता परस्पर में 32 प्रशासनिक अधिकारियों […]

Read more

पंकज सुबीर का उपन्यास: जिन्हें जुर्म-ए-इश्क़ पे नाज़ था…

“तुम लोग कमजोर और डरे हुए लोग हो, इसलिए ही तुम लोगों को विचारों से डर लगता है। तुम मोम के बने हुए पुतले हो, जो विचारों […]

Read more

कविता परस्पर की कविताओं में झांकती है मन की जमीन पर लरजती संवेदनाएं

साहित्य में एक नया तबका सामने आ रहा है नौकरशाह कवियों-लेखकों का. राजस्थान कैडर के आईएएस डॉ जितेंद्र सोनी द्वारा संपादित कविता परस्पर में 32 प्रशासनिक अधिकारियों […]

Read more