Archive for Category: कतरन

पंकज सुबीर का उपन्यास: जिन्हें जुर्म-ए-इश्क़ पे नाज़ था…

“तुम लोग कमजोर और डरे हुए लोग हो, इसलिए ही तुम लोगों को विचारों से डर लगता है। तुम मोम के बने हुए पुतले हो, जो विचारों की आग का सामना कर ही नहीं सकते, किसी भी तरह नहीं कर सकते। मोम के सारे पुतले चाहते हैं कि सारे...

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आहटें 2019

आहटें ————— अकेलेपन के बियाबाँ तवील जंगल में ये आहटें सी जो महसूस होती रहती हैं कभी ख़याल कभी दिल कभी नज़र के क़रीब समाअतों से ये मानूस होती रहती हैं ये बाज़गश्त हैं मुझमें कि हैं बजाहिर ये इन आहटों से मेरी रूह तक मचलती है ये आहटें...

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कविता परस्पर की कविताओं में झांकती है मन की जमीन पर लरजती संवेदनाएं

साहित्य में एक नया तबका सामने आ रहा है नौकरशाह कवियों-लेखकों का. राजस्थान कैडर के आईएएस डॉ जितेंद्र सोनी द्वारा संपादित कविता परस्पर में 32 प्रशासनिक अधिकारियों की कविताएं सम्मिलित हैं. कविता का समाज दिनोंदिन बड़ा हो रहा है. पहले कविता में कोई वर्गीकरण न था. वाद थे और...

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